Sunday, February 19, 2012

अंतर्द्वंद

सूखे पत्तों की सरसराहट
जैसे विचारों के टूटने का अहसास दिलाती हो,
जी करता है मैं भी शिकायत करूँ
बहती सर्द हवा से
ढलते सूरज से
सिमटती परछाई से
घोसलों में जाती चिड़ियों से
उन सारे प्रतीकों से
जो इस शाम के अकेलेपन का अहसास कराती हैं ।

आड़ी-तिरछी पगडंडियों पर,
बेमतलब कदमो से  रौंदता दूंढ़ रहा उस पगडण्डी को
जो दिल से दिमाग को जाती है
विस्मित होता बार बार
बेमतलब प्रयास ।
जी करता है मैं भी काट दू जो राह  तुम तक जाती है
तुमसे जुड़े होने का केवल आभास दिलाती है ।

शांत पानी की गहराई  अंतर्मन को समझाती है 
चट्टानें अपनी अकड़ से चरित्र को सिखाती हैं,
कुछ बूंदे छलकने से गहराई 
कम हो जाएगी 
या कुछ रेत गिरने से चट्टान गिर जाएगी 
जी करता है मैं रोऊँ आज
कुछ मिथ तोडू आज 
या बना रहूँ आदर्श, संतोषी, सहनशील । 


                         ------  अजय गौतम 'आहत'

Tuesday, January 24, 2012

तेरे दिल का हाल प्रिये

जब तुम घर से निकलोगे 
पर मुझको न पाओगे 
जब बेचैन निगाहों से
गली का कोना छानोगे
जब तुम यूँ अकेले में 
कोई उदास गीत गुनगुनाओगे, 

जब तुम बात बात पर 
घर पर मिलने आओगे,
पर मुझको न पाओगे

तब मैं पूछूँगा तुझसे तेरे दिल का हाल प्रिये ।

जब तुम अपनी किताबो पर, 
मेरा, लिखकर नाम मिटाओगे
जब उनमे दबा हुआ कहीं 
एक मेरा ख़त पाओगे 
जब तुम ख़त को पढ़ते पढ़ते 
थोडा भावुक हो जाओगे, 

जब तुम सहमे कदमो से
छुप-छुप कर छत पर जाओगे,
पर मुझको न पाओगे 

तब मैं पूछूँगा तुझसे तेरे दिल का हाल प्रिये । 

जब तुम किसी ख़ुशी में
फीका सा मुस्काओगे 
जब तुम रात में न खाने के
झूठे  बहाने बनाओगे
जब तुम अपने सपनो में
बस मुझको ही पाओगे, 

जब तुम सुबह से आस लगाओ  
शायद आज दिख जाओगे, 
पर मुझको न पाओगे 

तब मैं पूछूँगा तुझसे तेरे दिल का हाल प्रिये ।

जब तुम सबके संग में 
खुद को अकेला पाओगे 
जब तुम बाते करते करते
दूर कहीं खो जाओगे  
जब तुम घरवालो से अपनी 
गीली आँख चुराओगे, 

जब तुम किसी आवाज़ पर
मेरा आभास पाओगे,  
पर मुझको न पाओगे 

जब समझोगे तुम बिन कैसा था बेहाल प्रिये, 
तब मैं पूछूँगा तुझसे तेरे दिल का हाल प्रिये ।



                        ------  अजय गौतम 'आहत'


Saturday, December 17, 2011

कुछ तुमने तो कहा होगा

कुछ तुमने तो कहा होगा,
शायद मैं समझ न पाया,
कुछ तुमने तो कहा होगा

कुछ  तितलियाँ रंग बदलती थी,
कुछ हवा मदमस्त टहलती थी,
मस्त था मैं भी झंकारो में
कुछ कहा तुमने इशारों में

उस पल समझा यूँ ही होगा
कुछ तुमने तो कहा होगा

कुछ फीकी मुस्कानों से ,
बेरंग आसमानों से ,
ह्रदय की सुस्त धडकनों से,
सीने में दबे अरमानो से ,

पूछा , किसी ने तो सुना होगा,
चुप थे सब शमशानों से

कुछ प्यासी पानी की बूँदें ,
आँखों से फिसलने को बेताब,
इनसे भी माँगा मैंने ,
उस पल दो पल का हिसाब

तुम्हारी आँखों से भी शायद,
ये छलका होगा ,
कुछ तुमने तो कहा होगा

कुछ बोझिल कदम लेकर,
व्याकुल निगाहें संग लेकर,
कुछ शांत संकेतों की,
आहट का कुछ भ्रम लेकर

घड़ी की सुइयों की तरह,
मुड़ मुड़ कर आगे बढ़ता रहा,
शायद कुछ कहो अभी तुम,
मैं इंतज़ार करता रहा

आखिरी बार पलट कर देखा जब,
होंठ तुम्हारे कुछ हिले थे,
' न जाओ तुम ' शायद ऐसा ,
कुछ तुमने तो कहा होगा

मैं पढ़ते पढ़ते खो जाता हूँ,
उस वक़्त में जाना चाहता हूँ,
जब लम्हा कुछ सुन रहा होगा,
कुछ तुमने तो कहा होगा |

                          -----अजय गौतम 'आह़त

Tuesday, November 22, 2011

बेवफा

खुदा तारीफ करू क्या तेरे इंसाफ की ,
बेवफा कोई और, तबाह कोई और ...

कतरा कतरा बिखर गए यूँ उसकी जुदाई पर ,
उस  बेवफा को नाज़ है अपनी बेवफाई पर ..

कभी ख़त में लिखते थे  मुहब्बत के पैग़ाम
आज ख़त लिख रहा हूँ उस बेवफा के नाम ..

मयखाने से गुजर जाऊ या मयखाने में पनाह पाऊ
तुझे भुलाने के लिए बता किस हद तक गुज़र जाऊ ..




                                      -----अजय गौतम 'आह़त





Sunday, October 16, 2011

टीस

तुम भी कर सकते थे बयां रुसवाई का सबब, किसी गैर से सुना तो दुःख होता है ,
कही हर बात दिल की अपना समझ कर,  तूने न समझा तो दुख होता है ,

शहर की गलियों में भटकता ,पत्तो पत्तो से पता पूछा,
ग़म न होता गर तू देखती न, देखकर फेर ली नज़र तो दुःख होता है |

लावारिश आहें चुपके से कभी , हवाओ में बिखर जाती हैं ,
यूँ तो कोशिश है खुश रहने की, तेरी बात निकल आयी तो दुःख होता है ,


बारिश  बनकर इतना गिरे , जितना पानी समंदर में ,
ख्वाहिश नहीं तू भी रोये ग़म में, पर दुख भी नहीं ज़रा तो दुख होता है |


                                                   ------  अजय गौतम 'आहत'

Tuesday, April 12, 2011

इंतज़ार


हर सांस पर आस लगाये बैठे हैं ,
दिल में उठी आह दबाये बैठे हैं ,
कहीं गुज़र न जाओ हवा बनके ,
हर राह पर आँख लगाये बैठे हैं |

तोड़ दूँ ख़ामोशी की ज़ंजीर ,
कर दूँ ऐलान-ए-मोहब्बत दुनिया से ,
कहीं बदनाम हो न जाओ, शराफत है मेरी ,
हर ज़ज्बात को सीने में दबाये बैठे हैं |




               ----- अजय गौतम 'आह़त'

Tuesday, November 23, 2010

ख़ामोशी

क्या पूछते हो हाल हमारा ,
क्यूँ चेहरे पर निशां घिर आये हैं ,
कैसे बताये तुझको ऐ दोस्त ,
किस मंज़र से गुज़र कर आये हैं |


-----अजय गौतम 'आह़त'

Thursday, October 7, 2010

शिकायत

दिन सोने लगा अनजानें में,
जुल्फों को न ऐसे बिखराओ,
टूट न जाये ये सितारें कहीं ,
पलकों को ज़रा आहिस्ता गिराओ  |

हंसो न तुम खिलखिलाकर ,
सब शिकायत करते हैं ,
मैं तो समझा लेता हूँ  दिल को, 
पर वो गुलाब, जूही सब जलते हैं |

बोलती हो जब खनखनाकर ,
कुछ कविता सी बन जाती है,
मैं तो खो जाता हूँ खुद में कहीं,
पर बुलबुल की भौहें तन जाती हैं |

तुम्हारी इन चंचलताओं की,
अब चर्चा उनमें चलती है,
लहरों को भी आजकल ,
सागर में ख़ुशी नहीं मिलती है |

नयनों से ऐसे देखा न करो,
कुछ मदहोशी छा जाती है,
मैं व्यसन का तो दास नहीं ,
पर मदिरा कहीं चिढ जाती है |

कल सुबह की ओस , बाग़ में,
लड़ने लगी मुझसे,
कौन है मासूम ज्यादा,
पूछने लगी मुझसे |

कहीं टूट न जाये दिल उसका,
यूँ ही कुछ बहला दिया,
ना जाने  ऐसे कितने सवालो को,
बातों में ही टरका दिया |

आकर्षित तो नहीं हूँ तुम पर,
फिर  भी सब शक  करते हैं ,
तुम्हारी हर इक बात  का,
ये मुझसे  शिकायत करते हैं !


------ajay gautam ' आह़त '

Sunday, October 3, 2010

My dreams during 3:00 AM to 10:00 AM

This is the list of dreams which i saw today . I dont know whats the relation between all these events in a single dream.
(Note : its without manipulating and without adding anything extra.)

1. Someone's engagement whom i know and rush , crowding in ones house.

2. I lost my notes .

3. I'm working somewhere and my boss has something to tell but he does not get time.

4. India hits 3 fours in first over of Pak. Pak hits few fours and few sixes in first over of India.

5. Somebody bought me less expensive shoes . I bought my younger brother more expensive shoes.

6. Mom saying stay home for few days and go for shopping and buy some new clothes.

7. A gangster threatens to kill me if he ever sees me.

8. I cleared first step of my exam.

The list may look simple but sometimes when you are in sleep you get panicked .I did not get much sleep in my sleep.

The weird thing is that I always remember my dreams.